Himaanshu

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14 years ago @ Sachcha Sharanam - सौन्दर्... · 0 replies · +1 points

आभार!

14 years ago @ Sachcha Sharanam - सौन्दर्... · 0 replies · +1 points

नवरात्र के पूर्व व नवरात्र तक कई प्रविष्टियाँ प्रस्तुत करना चाह रहा हूँ।
सौन्दर्य लहरी व बाबूजी की लिखी ’शैलबाला शतक’ दोनों ही अपूर्ण अभी शेष हैं।
आभार।

14 years ago @ Sachcha Sharanam - गहगह वसंत · 0 replies · +1 points

मुदित करने वाली टिप्पणी का आभार ।

14 years ago @ Sachcha Sharanam - गहगह वसंत · 0 replies · +1 points

हाँ, पर ’कोंचने’ के बाद ! टिप्पणी का आभार।

14 years ago @ Sachcha Sharanam - गहगह वसंत · 0 replies · +1 points

यह आलेख वसंत पंचमी को ही लिख डाला था लगभग ! गिरिजेश भईया की ’कोंच’ स्मरण में थी, इसलिए! हर बार वसंत पर लिखने का सोचा था उनके कोंचने पर पिछली बार । सो बहुत कुछ उधारी का लेकर लिख डाला। कविताई कुछ विरम गयी है तो यही सही! अंतिम आठ पंक्तियाँ अपनी हैं, शेष तो सबको पता है।

आप पढ़ कर मुझे कोसते यूँ ही चले नहीं जायेंगे- कुछ कहेंगे ना !
साभार!

14 years ago @ Ramyantar - स्नेहिल ... · 0 replies · +1 points

यह प्रविष्टि सालों पहले लिखी गयी थी ! उस वक्त सीख रहा था कविता लिखना-पढ़ना । बाद में इसे ब्लॉग पर पोस्ट किया, अब स्थायी रूप से इस साइट पर ।

14 years ago @ Sachcha Sharanam - वैवाहिक ... · 0 replies · +2 points

हाँ, सही कह रहे हैं आप ! पर वैवाहिक जीवन के प्रवाह में कई ऐसे मौके आते होंगे जब टकरा कर सिर फोड़ने वाले युगल इन वचनों को याद करने को विवश होते होंगे, उन्हें तब इन वाक्यों के उपयोगी होने का एहसास ज़रूर होता होगा । हाँ यह जरूरी है कि अपनी शादी के वक़्त उन्होंने ये बातें ख़्याल से सुनी हों, और समझी भी हों ।:)

14 years ago @ Sachcha Sharanam - वैवाहिक ... · 0 replies · +1 points

बाबूजी से इसे गेय बनाने का आग्रह था ही मेरा । साथ ही इसकी लोक भाषा में रचना इसे सुन्दर बना रही है..हमें परम्परा-संयुक्त कर रही है ।

14 years ago @ Sachcha Sharanam - वैवाहिक ... · 0 replies · +1 points

धन्यवाद !

14 years ago @ Sachcha Sharanam - सौन्दर्... · 0 replies · +1 points

कोशिश है, नियमित रहूँ !
आभार ।